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युवा चिकित्सकों के लिये मिसाल है डॉ केपी अग्रवाल का जीवन
21 नवम्बर 2018 23:49
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“मैं जब मात्र 9 वर्ष का बच्चा था तभी मेरी मां न्यूरो संबंधी बीमारी से मुझे छोड़ कर चली गई,उनका इलाज नही हो सका था। उस वक्त मुझे कुछ भी सूझ नहीं रहा था कि मैं क्या करूं।जीवन बिन माँ के जीना बहुत कठिन था। फिर मैंने ठाना की मैं डॉक्टर बनने की कोशिश करूंगा ताकि कोई मेरी उम्र का बच्चा बिन मां के जीने को विवश ना हो। और मैं डॉक्टर बनने में सफल हुआ।”

-डॉ केपी अग्रवाल(वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ, उम्र 75 वर्ष)

 

पूर्वांचल के प्रथम निजी हड्डी का अस्पताल फ्रैक्चर क्लीनिक के माध्यम से 50 हजार से अधिक पोलियोग्रस्त ,दुर्घटना से पीड़ित लोगों का सफल ऑपरेशन कर उनके जीवन में रंग लाने वाले वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर केपी अग्रवाल ने अपने जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव देखे,लेकिन कभी अपने आदर्शों, मूल्यों से समझौता नहीं किया। विभिन्न संस्थाओं तथा स्वयं के प्रयास से हजारों पोलियो पीड़ित बच्चों,बच्चियों,महिलाओं और पुरुषों का सफल ऑपरेशन कर उनको चलने फिरने और जीवन जीने लायक बना कर समाज मे स्थान प्राप्त कराया।जीवन के हीरक जयंती वर्ष में प्रवेश करने के बावजूद आज भी उसी ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं, जैसा 1970 में सर्जन बनने के बाद शुरू किया था।

रूढ़िवादी परम्पराओं से भी खूब लड़ना पड़ा:

नये चिकित्सकों को जानना चाहिए कि डॉक्टर केपी अग्रवाल कभी रुके नहीं। उनके जीवन से आज के युवाओं को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। डॉक्टर अग्रवाल ने उस दौर में वाराणसी में निजी हड्डी का अस्पताल खोलने का निर्णय लिया जब लोग रूढ़ीवादी परंपराओं, नीम हकीम के चक्कर में रहते थे और हड्डी के डॉक्टर को कोई जानता भी नहीं था।उनका साहसिक निर्णय यूं ही सफल नही हुआ।उन्होंने वर्षों तक मुफ्त में सफल इलाज,ऑपेरशन कर लोगों को ठीक किया, जिससे धीरे धीरे लोगों में अस्थि रोग विशेषज्ञ के प्रति विश्वास जगने लगा।इसका लाभ बाद के चिकित्सकों को भी मिला।

डा अग्रवाल ने सरकारी अस्पतालों की तुलना में ज्यादा संख्या में मरीजों का ऑपरेशन किया जिससे उन हजारों परिवारों जिनके जीवन में अंधेरा छाया था की रोशनी लौट आयी।

पटना मेडिकल कॉलेज से ली डिग्री:

औरंगाबाद बिहार के साधारण परिवार में जन्मे और 1967 में पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस तथा 1970 में वहीं से ऑर्थोपेडिक सर्जन की डिग्री प्राप्त करने के बाद आज 48 वर्षों में डॉक्टर के पी अग्रवाल का नाम देश के ख्याति लब्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ में जाना जाता है।

डॉ अग्रवाल बताते हैं पद्मभूषण डॉ बी मुखोपाध्याय जो अपने जमाने के देश के ख्याति लब्ध ऑर्थो सर्जन थे ने मुझे खूब सिखाया,मुझे ट्रेनिंग दी। मैंने इंग्लैंड में भी 2 वर्षों तक सर्जरी कर दक्षता हासिल किया।

3 हजार पोलियो मरीजों का किया मुफ्त इलाज:

जीवन में अब तक 3 हजार से अधिक पोलियो ग्रस्त बच्चों की मुफ्त में सर्जरी कर आत्मिक शांति मिलती है। उनकी दुआओं का नतीजा है कि आज मेरे ऊपर लोग आंख बंद कर विश्वास करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय विकलांग बच्चों के लिए कार्य करने वाली संस्था किरण का मैं लगातार 6 वर्ष तक अध्यक्ष रहा और 15 वर्षों से मुख्य सर्जन हूं।मुझे सर्जन के रूप में राज्यपाल से पुरस्कार भी मिल चुका है।

मरीजों की दुआ,आशीर्वाद ही मेरी पूंजी:

मेरी सर्जरी से स्वस्थ युवतियों जिनका अपंगताकी वजह से विवाह तक नहीं हो सकता था,आज सफलतापूर्वक अपनी गृहस्ती चला रही हैं।कई लोगों की नौकरी लगी।मेरी सबसे बड़ी पूंजी यही है। इन लोगों की दुआएं आशीर्वाद मुझे सदैव प्राप्त होता है। इसलिए जीवन के 75 वर्ष में भी मैं सदैव सेवा हेतु तत्पर हूं तथा काम कर रहा हूं।

जब गांधी को दिया नया जीवन:

अभी हाल ही में बिहार भभुआ का एक 4 साल का बच्चा मेरे पास आया। उसका एक्सीडेंट हो गया था तथा दोनों पैरों के ऊपर से गाड़ी गुजर गई थी।पैर बेजान हो गए थे अत्यंत गरीब परिवार का था।जांघ की मांसपेशी तक नहीं दिख रही थी, दोनों पांव ठंडे पड़ गए थे और काटने की स्थिति थी लेकिन मैंने युवा एनेस्थीसिया चिकित्सक डॉ निशु अग्रवाल के आत्मबल से साहस दिखाया।उसके परिजन को परिजन एक यूनिट खून तक लाने की स्थिति में नहीं थी। मैंने उसका मुफ्त 10 बार ऑपरेशन किया। उस बच्चे की जान बच गयी।




अनेक सामाजिक संस्थाओं में हैं महत्वपूर्ण पदों पर:

डॉक्टर अग्रवाल ने इस तरह के पुण्य के अनेक काम किए हैं।अनेक सामाजिक संस्थाओं जिनमें आर्य महिला पीजी कॉलेज प्रबंध कारिणी समिति के उपाध्यक्ष,थियोसोफिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया वाराणसी बॉयज स्कूल के प्रबंधक, विशेश्वर ट्रस्ट के ट्रस्टी के होने के साथ वर्षों से रोटरी क्लब से भी जुड़े हैं। आज के दौर में इस तरह के चिकित्सक निजी क्षेत्र में ढूंढने से भी नहीं मिलते।




कर्म को मानते हैं पूजा:

चिकित्सा क्षेत्र को लोगों ने व्यवसाय बना लिया है। जबकि पुराने जमाने से चिकित्सा व्यवसाय नहीं सेवा मानी जाती रही है।डॉक्टर के पी अग्रवाल सेवा के सिद्धांत पर काम करते हैं। कर्म को पूजा मानते हैं तथा चिकित्सकीय कार्य को सेवा। उनके जैसे सर्जन पूरे पूर्वांचल में आज के दौर में भी ढूंढने से नहीं मिलते।

#डॉ_राज_कुमार_सिंह

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