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बीएचयू के इस चिकित्सक ने एम्स के मुद्दे पर पीएम मोदी को लिखा खुला पत्र,लगाए कई गंभीर आरोप
01 जुलाई 2018 23:56
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वाराणसी(जनवार्ता)।काशी हिन्दू विश्विद्यालय चिकित्सा विज्ञान के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो ओमशंकर ने 2000 बेड के सम्पूर्ण ऐम्स की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखा है।उन्होंने बीएचयू के अधिकारियों कर्मचारियों पर साजिश का भी आरोप लगाया है।ज्ञातव्य है कि डॉ ओमशंकर ने ही सबसे पहले एम्स की मांग को लेकर आंदोलन चलाया था।इन्होंने काफी दिनों तक अनशन भी किया था।उन्होंने एम्स न बनवाने की सूरत में पीएम को चुनाव में नुकसान की भी बात कही है।डॉ ओम शंकर ने जो पत्र प्रधानमंत्री को लिखा है वो निम्न है

 

सेवा में,

श्री मान प्रधानमंत्री महोदय,

भारत सरकार,नई दिल्ली।



विषय-- काशी में 2000 बिस्तरों वाले सम्पूर्ण एम्स के निर्माण के लिए निवेदन पत्र।



महाशय!



    सविनय निवेदन यह है कि आप हमारे सांसद होने के साथ-साथ आज देश के प्रधानमंत्री भी हैं। काशी चिकित्सा जगत की जननी है और भारतीय संस्कृति की धरोहर भी।भगवान धनवंतरि से लेकर देवदास,चरक और सुश्रुत जैसे वैद्य इसी धरती से जुड़े रहे।कभी पूरी दुनियाँ को स्वस्थ रखनेवाली काशी तथा आसपास की जनता आज आपके प्रधानमंत्री रहने के बावजूद अपने विशिष्ट इलाज के लिए पूरे भारतवर्ष में भटकने को मजबूर हैं!



स्वास्थ सेवाओं के बेहाली की वजह से इस आसपास के हज़ारों लोग सालों से यहां एम्स बनाये जाने को लेकर आंदोलनरत हैं, परंतु आपके द्वारा पूर्वांचल में घोषित एम्स को गोरखपुर भेज दिए जाने से विधानसभा चुनाव से पहले वो काफी आहत हुए थे, परंतु उनको अटूट विश्वास था कि आप उनकी मांगे संसदीय चुनाव से पहले मानकर न सिर्फ उनकी भावनाओं का आदर करेंगे बल्कि अपने आपको भी इतिहास के पन्नों में दर्ज करवाएंगे!



लेकिन एक बार फिर से उन जनता के भावनाओं के साथ BHU के कुछ भ्रष्ट तथा स्वार्थी अधिकारियों द्वारा "अपनी भ्रष्टाचार की बगिया" कायम रखने के लिए, एक असंवैधानिक सहमति पत्र पर दस्तखत कर खिलवाड़ करने की कोशिश की जा रही है,जिससे वो इतने आहत हैं कि वो अपने एम्स आंदोलन को और तेज करने को मजबूर हो गए हैं!



BHU के कुछ स्वार्थी अधिकारी तथा उनके समर्थक मठाधीश/राजनेता किसी भी कीमत पर यहां एम्स नहीं बनने देना चाहते हैं जिससे उनकी उमंग फ़ार्मेसी/CT स्कैन/MRI जैसी दुधारू गायें उनके हाथों से निकल जाये। अर्थात आज 10-20 लोगों का निजी स्वार्थ इस आसपास के 20 करोड़ आम जनता के स्वास्थ के अधिकार के साथ-साथ आपके अहित कराने पर भी आमदा हैं, जिनके CBI जांच करवाने की जरूरत है।



इसलिए इस "स्वार्थी गैंग" के सदस्यों  ने एक साजिश के तहत एक झूठी अफवाह फैलाई कि "BHU में एम्स बनने से महामना की बगिया टूट जाएगी"!



इस झूठ को आपतक पहुंचने के लिए इन लोगों ने आपके दिल्ली स्थित PMO के एक उच्च अधिकारी का सहारा लिया।जिनकी गलत सूचना और दिए धोखे की हीं वजह से शायद आप काशी में घोषित एम्स को गोरखपुर भेजे जाने पर सहमत हुए!



पिछले विधानसभा चुनाव में स्वास्थ बहुत बड़ा मुद्दा बना था (और इस बार के आम चुनाव में उससे भी बड़ा मुद्दा बनेगा) जिसकी वजह से आपकी पार्टी ने सरकार बनने पर उत्तरप्रदेश में 6 नए एम्स और 24 नए सुपरस्पेशलिटी सेन्टर बनाने के चुनावी वादे किये, जो आज 1 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वास्तविक धरातल पर शून्य हीं दिख रहा है!



जल्द हीं 2019 का आम चुनाव आनेवाला है जिसकी वजह से केंद्रीय कैबिनेट ने हाल हीं में 20 नए एम्स बनाये जाने को मंजूरी दी है जिसके बाद काशी को एक नया सम्पूर्ण एम्स मिलना तय दिख रहा था जो नए MoU से ध्वस्त होता दिख रहा है और काशी की जनता अपने आपको ठगा महसूस कर रही है, लेकिन इस संबंध में आपके सकारात्मक रुख को देखते हुए वो आज भी यह मानती है कि आप काशी को एक नया 2000 बिस्तरों वाला सम्पूर्ण एम्स जरूर देंगे।



परंतु आपकी चाहत और काशी के आसपास की 20 करोड़ जनता के स्वास्थ के अधिकार के बीच में आज BHU के कुछ स्वार्थी उच्च पदस्त अधिकारी, BHU/महामना को अपनी बपौती समझनेवाले मठाधीश तथा उनके समर्थक कुछ आपकी हीं पार्टी के स्थानीय नेतागण खड़े हो गए हैं जिनको उखाड़ फेंकने की आपको शख्त जरूरत है।



आपको यह समझना होगा कि इस कुत्सित कार्य में आज IMS, BHU के कुछ ऐसे भी अधिकारी अपनी अवैध कुर्सियां बचाने के लिए विभीषण बन गए हैं जो कलतक IMS को एम्स बनाने की वकालत करते नहीं थकते थे और यहां तक कि BHU में हुए एम्स आंदोलनों तक में शामिल रहे हैं।



BHU के कुछ उच्च अधिकारीगण जब भी यहां एम्स बनने की बात आती है महामना की बगिया टूट जाएगी का गाना गाने लगते हैं क्योंकि BHU का केंद्रीय कार्यालय आज अस्पताल में इलाज को आनेवाले मरीजों से एकत्रित धनराशि में से 20% राशि तो सीधे-सीधे IMS से गुंडा टैक्स/रंगदारी के तौर पर वसूलती है तथा सर सुंदर लाल अस्पताल में भ्रष्टाचार के अन्य स्रोतों द्वारा जनित पैसे भी कहीं न कहीं BHU में बननेवाले एम्स का उनके द्वारा विरोध किये जाने की एक सबसे महत्वपूर्ण वजह है।



महोदय, किसी भी विश्वविद्यालय का उसके अंदर स्थित कॉलेजों के साथ जुड़ाव का अर्थ सिर्फ इतना होता है कि वो उन कॉलेजों में पढ़नेवाले छात्रों की परीक्षा लेकर उनको सही समय पर डिग्रियां प्रदान करती हैं!



# परंतु BHU में बननेवाले एम्स के लिए हमलोग न सिर्फ यह चाहते हैं कि वह "संपूर्ण एम्स" बने बल्कि इसका BHU के साथ भी जुड़ाव बना रहे, परंतु यह जुड़ाव कितना हो जिससे नए बनने वाले एम्स की कार्यप्रणाली पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े यह सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है!



# इस संबंध में महामना/BHU को अपनी बपौती समझने वाले मठाधीशों और कुछ स्वार्थी उच्च पदस्थ अधिकारियों की राय में जुड़ाव का अर्थ है करोड़ों रुपये सरकार से तो 20 करोड़ जनता के नाम पर संस्थान को आये परंतु यह आमजनता तक पहुंचने के बदले उनके पेट मे शमा जाए!



# ....जबकि हमलोगों के जुड़ाव का अर्थ है कि जिस तरह किसी अन्य विश्वविद्यालयों का जुड़ाव वहां के कॉलेजों  के साथ होता है (सम्पूर्ण प्रशासनिक तथा वित्तिय स्वतंत्रता के साथ) उससे कहीं ज्यादा जुड़ाव BHU में बनने वाले नए एम्स का BHU के साथ होना चाहिए, परंतु जो पैसा सरकार गरीबों के लिए स्वास्थ सुविधायें बढ़ाने के लिए यहां दें उसका लाभ सिर्फ आम जनता को मिले, जैसा कि आप अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनता को पहुंचाने तथा बिचौलियों को खत्म करने के लिए करोड़ों जन-धन बैंक खाते खुलवाकर करने की कोशिश की है!



# अर्थात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय न सिर्फ इस कैंपस में बननेवाले एम्स में पढ़नेवाले छात्रों की समय-समय पर सिर्फ परीक्षा लेकर उनको अपनी डिग्री दें, (जो बाध्यता आज IIT के ऊपर नहीं है आइल लोग उसे BHU का हिस्सा नहीं मानते हैं) बल्कि नए एम्स के "गवर्निंग कॉउन्सिल" में BHU के कुलपति को स्थायी तौर पर "एक्स ऑफिसियो चैयरमेन" का दर्जा मिले, BHU की सबसे उच्च प्रशासनिक संस्था,एग्जीक्यूटिव कौंसिल के 2 सदस्य भी नॉमिनी के तौर उस गवर्निंग कॉउन्सिल में शामिल किए जाए!



# महामना और BHU के साथ और मजबूत जुड़ाव बनाने के लिए इस नए बननेवाले एम्स का नाम IMS, BHU न होकर "महामना इंस्टिट्यूट ऑफ  मेडिकल साइंसेज" हों, ताकि महामना हमेशा के लिए नए एम्स के साथ जुड़ जाए!



लेकिन "नए एम्स के डायरेक्टर" के चयन में "BHU के कुलपति" का कोई भी हाथ न हो जैसा किसी अन्य एम्स के डायरेक्टर के चयन में होता है (जैसा की अन्य किसी भी विश्वविद्यालय में प्रिंसिपल के चुनाव में किसी भी कुलपति का कोई हाथ नहीं होता है और जो आज यहां अयोग्य उम्मीदवार के चयन और उससे जनित अस्पताल में फैले भ्रष्टाचार की भी मुख्य वजह है)। चुनाव का आधार सिर्फ और सिर्फ मेरिट तथा ईमानदारी हो, न कि पाँव पूजन, जिससे अस्पताल में फैले गहरे भ्रष्टाचार को जड़ से खात्म किया जा सके!



बांकी की प्रशासनिक तथा वित्तीय संरचना और सुविधायें बिल्कुल वैसी हीं होनी चाहिए जैसा कि एम्स दिल्ली का है।



# आज के IMS डायरेक्टर द्वारा किया गया MOU न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि शिवाय अच्छे-अच्छे शब्दों तथा कुछ अधिकार विहीन सब-कमिटियों के अलावा अक्षरसः वही है जैसा कि आज का IMS, जहां चारों तरफ लूटमार मचा है, चोरों का बोलबाला, बलात्कारी अधिकारी बने बैठे हैं।इस पूरे MoU में एम्स अथवा एम्स जैसी कोई भी चीज दूर-दूर तक कहीं भी नजर नहीं आती हैं और न हीं इसमें कोई वित्तीय तथा प्रशासनिक स्वतंत्रता IMS को देने जैसी कोई बात लिखी है। यही नहीं इसको भविष्य में मिलनेवाले वित्तीय राशि का भी कहीं कोई उल्लेख तक नहीं है!



इसलिए हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि BHU के स्वार्थी अधिकारीगण अगर अपनी भ्रष्टाचारी कुंठा को कायम रखने के लिए BHU के अंदर 2000 बिस्तरों वाला सम्पूर्ण एम्स नहीं बनने देना चाहते हैं तो उसी धनराशि से आप इस 2000 बिस्तरों वाले एम्स को "BHU से बाहर अदलपुरा के सब्जी अनुसंधान केंद्र" में बनवाएं जो आपको अगले आम चुनावों में काफी लाभ पहुंचाएगा और कोई भी झुनझुना थमाने की कोशिश आपको पूरे देश में काफी नुकसान पहुंचाएगा,निर्णय आपके पास है श्रीमान आप किसे सही मानते हैं!

              धन्यवाद!

आपके सुविवेक निर्णय के इंतज़ार में--

काशी तथा आसपास की 20 करोड़ जनता!

प्रेषक- डॉ ओम शंकर

#bhuaiims

#dromshanker

#pmmodivaranasi

#surshunderlalhospital

 
 
 
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