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आयुर्वेद में है डेंगू से बचाव का दम
25 सितम्बर 2018 20:12
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  डेंगू मुख्य रूप से बरसात के बाद जुलाई से अक्टोबर के महीने में जब मौसम में बहुत गर्मी और उमस होती है ऐसे समय मे मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इस मौसम में एडीज मच्छरों के बढ़ने का सबसे अनुकूल समय होता है। इनके काटने से डेंगू का वायरस शरीर मे प्रवेश कर जाता है और यह बीमारी हो जाती है । इस बीमारी का इलाज अल्लोपथ में अब तक नही है केवल लाक्षणिक चिकित्सा की जाती है। आयुर्वेद में भी इसके इलाज के लिए बहुत सी औषधीय है जिसके बारे में बता रहे है राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय और चिकित्सालय के कायचिकित्सा और पंचकर्म विभाग के प्रवक्ता डॉ अजय कुमार -


क्या है एडीज की पहचान -

इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। इसलिए इन्हें टाइगर मोस्क्विटो भी कहते है। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं।

कैसे फैलता है डेंगू -
डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून को जब मच्छर पीता है तब खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है। जब डेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है।

कितने दिनों में डेंगू के लक्षण दिखते है --
मच्छर के काटे जाने के करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। इसके लक्षण बीमारी के आधार पर अलग अलग होते है । डेंगू तीन तरह का होता है
1. क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार
2. डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF)
3. डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)

साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है और इससे जान जाने का खतरा नहीं होता लेकिन  DHF या DSS होने पर उसका फौरन इलाज शुरू नहीं किया जाय तो जान जा सकती है। इसलिए यह पहचानना सबसे जरूरी है कि बुखार साधारण डेंगू है, DHF है या DSS है।

मुख्य लक्षण क्या-क्या  है --
1. ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना
2. सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
3. आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है
4. शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना
5. डेंगू शॉक सिंड्रोम और हेमोरैजिक फीवर की अवस्था मे मुख और नाक से रक्त आने लगता है।

6. समय से इलाज नही मिलने से कई बार मल्टी ऑर्गन फेल्योर भी हो जाता है।

क्या है डेंगू में प्लेटलेट्स की भूमिका --

सामान्य  स्वस्थ व्यक्ति  के शरीर में डेढ़ से तीन लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करती हैं। डेंगू का वायरस आमतौर पर प्लेटलेट्स कम कर देता है, जिससे बॉडी में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।  अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। 40-50 हजार प्लेटलेट्स तक ब्लीडिंग नहीं होती।

क्या इलाज़ कर सकते है डेंगू में --
डेंगू के लक्षण दिखने पर किसी अच्छे फिजिशियन के पास जाना चाहिए। अगर डेंगू शॉक सिंड्रोम और डेंगू हेमोरराजिक फीवर है तो ICU युक्त चिकित्सालय में जितनी जल्दी हो सके दिखाए। अगर इस टाइप का डेंगू नही है तो पैनिक होने की जरूरत नही है । आयुर्वेद में इसके इलाज और बचाव नीचे लिखे तरीको से कर सकते है -

1. एक कप पानी में एक चम्मच 10 मिली गिलोय का रस, दो काली मिर्च, तुलसी के पांच पत्ते और अदरक को मिलाकर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर प्रतिदिन 50 मिली लें।

2. सुबह और रात को आधा चम्मच हल्दी एक गिलास दूध के साथ लें।
3. तुलसी के पत्तों का 20 मिली रस शहद के साथ मिलाकर लें

4. तुलसी के 10 पत्तों को 200 गिलास पानी में उबालें, और छानकर पानी को पीएं।

5.चिरायता  बुखार उतारने की आयुर्वेद की  प्रसिद्ध औषधि है। इसका 20 मिली काढ़ा लें या 2 ग्राम चूर्ण पानी से लेने से बुखार उतरने लगता है।

6. विभिन्न शोध में पपीते की पत्तियों के रस को डेंगू  में बहुत उपयोगी पाया गया है। इसके लिये कुछ पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोकर और छानकर 10 -20 मिली जूस को में तीन-चार बार पिलाया जाता है। इससे शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से बढ़ती है।

7. गेहू का ज्वार, पपीते के पत्ता और गिलोय इन सबका रस मिलाकर 50 मिली की मात्रा में पीने से भी प्लेटलेट काउंट बढ़ता है।

8. नीम, तुलसी,गिलोय ,पिप्पली , पपीते की पत्तियों का रस, गेंहू के ज्वारों का रस, आँवला व ग्वारपाठे का रस डेंगू से बचाव में बहुत उपयोगी है। इनसे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढती है तथा डेंगू के वायरस से मुकाबला करने की ताकत आती है।

यहां ध्यान देने की बात है कि डेंगू की कोई विशिष्ट चिकित्सा अभी तक उपलब्ध नहीं है। सिर्फ लाक्षणिक चिकित्सा ही की जाती है। यदि लक्षणों में  जल्दी आराम ना दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिये।
 
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